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Tuesday, July 14, 2026
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गोपाल मणि महाराज ने गाय को ‘ राष्ट्र माता ‘ घोषित करने को प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

 

 

– चोपड़धार में एक वर्ष से चल रहा गौ प्रतिष्ठा यज्ञ संपन्न

देहरादून। गोपाल मणि महाराज के ऐतिहासिक “गौ प्रतिष्ठा यज्ञ” की पूर्णता के परिप्रेक्ष्य में गौमाता को “राष्ट्र माता” घोषित करने के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन प्रेषित किया गया।

इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी के सेवानिवृत कर्मचारी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक रमेश रमोला ने बताया ज्ञापन में कहा गया उत्तरकाशी के विकासखंड चिन्यालीसौड़ स्थित गमरी पट्टी के चोपड़धार में गौ प्रतिष्ठा यज्ञ दिनांक 25.05.2025 से प्रारम्भ हुआ तथा दिनांक 05.06.2026 को सम्पन्न हो रहा है।

निरन्तर एक वर्ष से अधिक समय तक यज्ञ विधि-विधान से चलता रहा। इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक गौ प्रतिष्ठा यज्ञ अनुष्ठान की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।

सांस्कृतिक एवं सामाजिक पुनरुत्थान: गाय को आधिकारिक तौर पर राष्ट्र माता घोषित करने से हमारी प्राचीन धरोहर और वसुधैव कुटुम्बकम के दर्शन को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी। इससे समाज में जीवों के प्रति करुणा, अहिंसा और संवेदनशीलता की भावना बढ़ेगी।

वर्तमान में सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा गोवंश की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनेंगे, जिससे पशु क्रूरता पर रोक लगेगी। जब इन मवेशियों को सुरक्षित गोशालाओं में आश्रय मिलेगा, तो शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में भी भारी कमी आएगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और चक्रीय मॉडल (Circular Economy): यदि हम गाय को एक समृद्ध आर्थिक संसाधन के रूप में देखें, तो ग्रामीण भारत का कायाकल्प हो सकता है, क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है।

देश के कुछ राज्यों (जैसे छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश) में लागू “गोधन न्याय योजना” ने यह साबित किया है कि गाय का गोबर और गोमूत्र अपशिष्ट नहीं, बल्कि मूल्यवान उत्पाद हैं।

इस मॉडल के तहत प्राकृतिक एवं जैविक खेती गोबर से बनी वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) और गोमूत्र आधारित कीट नियंत्रकों के उपयोग से रासायनिक खादों (यूरिया, डीएपी) पर निर्भरता कम होगी, जिससे भूमि की उपजाऊ क्षमता सुधरेगी और सरकार पर फर्टिलाइजर सब्सिडी का वित्तीय बोझ घटेगा।

गोशालाओं को ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर गोबर से प्राकृतिक पेंट, दीये, अगरबत्ती और गोमूत्र से आयुर्वेदिक औषधियाँ बनाई जा रही हैं। इससे ग्रामीण युवाओं और विशेषकर महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है। 

हरित ऊर्जा (Green Energy) गोबर के माध्यम से बड़े पैमाने पर बायोगैस और सीएनजी प्लांट लगाकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन की आपूर्ति की जा सकती है, जो पेट्रोलियम उत्पादों पर देश की निर्भरता को कम करने में सहायक होगा।

बूढ़ी या दूध न देने वाली गायों को समाज बोझ न समझे, इसके लिए गोबर-गोमूत्र की सरकारी खरीद और व्यावसायिक उपयोग का एक आत्मनिर्भर आर्थिक मॉडल पूरे देश में लागू किया जा सकता है।

अतः समस्त भारतवासियों, पूज्य संतों और धर्मप्रेमियों की ओर से आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि देश के कल्याण, समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक गौरव की पुनर्स्थापना के लिए गौमाता को “राष्ट्र माता” घोषित करने की कृपा करें।

देवभूमि उत्तराखंड उत्तरकाशी के चोपड़धार की इस पावन और तपोनिष्ठ भूमि से उठी यह पुकार देश में एक नए युग का सूत्रपात करेगी, ऐसा हमें पूर्ण विश्वास है। 

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