प्रतिष्ठा में,
माननीय श्री अश्वनी वैष्णव जी
मंत्री
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय/रेलवे
भारत सरकार, शास्त्री भवन,
नई दिल्ली-110001
विषय : PRGI के नए नियमों से छोटे और मझौले अखबारों के उत्पीड़न और CBC की विज्ञापन दरों को पुनरीक्षित करने के संबंध में।
महोदय,
अवगत कराना है PRGI द्वारा अभी हाल ही में नए नियमों के द्वारा प्रिंट मीडिया को समाप्त करने का कुचक्र रचा गया है । समाचार पत्र और पत्रिकाओं को कहा गया है कि वह अपने प्रकाशित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं की फोटो खींचकर PRGI के पोर्टल पर अपलोड करें । समझ में नहीं आता है कि इससे क्या हासिल होगा ? उस खींचे गए फोटो को पढ़ा भी नहीं जा सकता । इसके स्थान पर पीडीएफ फाइल अपलोड कराई जाती तो वह पढ़ी भी जा सकती हैं । उल्लेखनीय तथ्य यह है कि PRGI, CBC और PIB के कार्यालय प्रदेश की राजधानियों में ही है । जनपदों से अखबार के प्रकाशकों को प्रदेश की राजधानियों में पीआईबी के कार्यालय में ही अखबार जमा कराने जाना पड़ता है । यह व्यय साध्य कार्य है । देश के प्रकाशक नियमित रूप से रोजाना जिला सूचना कार्यालय में अखबार जमा करते है । राज्यों के सूचना निदेशालय में भी अखबार जमा कराए जाते है । प्रत्येक माह PIB में भी अखबार जमा कराने जाना पड़ता है । आखिर छोटे और मझौले अखबारों के प्रकाशक को कितना उत्पीड़ित जाएगा ? समाचार पत्रों को सरकार क्या दे रही है ? इस पर भी विचार किया जाना चाहिये । CBC अपनी बनाई विज्ञापन नीति का स्वयं अनुपालन नहीं कर रही है । राष्ट्रीय पर्वों तक पर मिलने वाले विज्ञापन भी चुनिंदा अखबारों को जारी किए जा रहे है । निर्धारित अनुपात में भी अखबारों को CBC विज्ञापन जारी नहीं कर रही । कलर के नाम पर भी नियमों के विपरीत छोटे व मझौले अखबारों को उत्पीड़ित किया जा रहा है । भारतीय प्रेस परिषद की विज्ञापन संबंधी मामलों की उपसमिति की सिफारिशों को आज तक लागू नहीं किया गया है । साथ ही भारतीय प्रेस परिषद द्वारा छोटे और मझौले अखबारों को GST से मुक्त करने की भारतीय प्रेस परिषद की सिफारिश को भी आज तक नहीं लागू किया गया है । समाचार पत्रों के हित में नियमानुसार भारतीय प्रेस परिषद की सिफारिशों को तत्काल लागू किया जाना चाहिए ।
माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के 13 मई 2015 को कॉमन काज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में दिए गए निर्णय का भी सरकार द्वारा अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है । इस निर्णय के अनुसार सभी समाचार पत्रों को बिना किसी भेदभाव के समानता के आधार पर विज्ञापन जारी किए जाने चाहिए ।
PRGI को समाचार पत्र/पत्रिकाओं के नियमित प्रकाशन की पुष्टि जनपदों के सूचना कार्यालयों एवं प्रदेश के सूचना निदेशालय से करानी चाहिए । सभी समाचार पत्र और पत्रिकाएं इन कार्यालय में अनिवार्य रूप से भेजी जाती है । बहुत से छोटे और मझौले अखबारों पर अपने निजी संसाधन ही नहीं होते । वह जॉब वर्क कराते है । वर्ष 2016 से निरंतर छोटे और मझौले का अखबारों का शोषण किया जा रहा है । PRGI वर्षों से शीर्षक, पंजीयन आदि के हजारों प्रकाशकों के प्रकरण निस्तारित नहीं कर सकी है । PRGI में मानव शक्ति तक का अभाव है । अनेकों प्रकरण PRGI में लंबित है । प्रसार जांच के नाम पर CA का भारी राशि का शुल्क निर्धारित किया गया है । जो कि अनुचित है । जब प्रसार जांच सरकार करा रही है तब प्रकाशक से यह शुल्क क्यों लिया जा रहा है ?
काफी लंबे समय से CBC की विज्ञापन दरों का निर्धारण नहीं हुआ है । जबकि मूल्य सूचकांक के आधार पर विज्ञापन दर निर्धारित होनी चाहिए । सरकारी नौकरी करने वालों का वेतन प्रत्येक वर्ष बढ़ाया जाता है । फिर समाचार पत्रों के साथ यह भेदभाव क्यों किया जाता है ?
सरकार की नीति सिंगल विंडो सिस्टम की है फिर समाचार पत्रों पर यह सिंगल विंडो सिस्टम लागू क्यों नहीं किया जा रहा है ? आज तक समाचार पत्रों को उद्योग की श्रेणी में परिभाषित नहीं किया गया है । समाचार पत्रों काम देश के लोगों को जागृत करने का रहा है । समाचार पत्र पाठकों को लागत से बहुत कम मूल्य पर उपलब्ध कराया जाता है । पूर्व में समाचार पत्रों को अनुदानित दरों पर कागज का कोटा दिया जाता था ।
आपसे अनुरोध है कि उपरोक्त तथ्यों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करके PRGI को पूर्ववत व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्देशित करने की अनुकंपा करें । साथ ही अविलंब CBC को भी विज्ञापन दर पुनरीक्षित करने के लिए निर्देशित करने का कष्ट करें ।
आशा है कि आप छोटे और मझौले अखबारों के प्रकाशकों के हित में निर्णय लेने की कृपा करेंगे ।
सादर !
भवदीय
एन के गुसाईं
अध्यक्ष
जयदीप भट्ट
महासचिव
उत्तराखंडी मूल निवासी पत्रकार एसोसिएशन
प्रतिलिपि सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु :
1. न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, चेयरमैन-भारतीय प्रेस परिषद, नई दिल्ली ।
2. अनिल बलूनी सांसद पौड़ी गढ़वाल उत्तराखण्ड / मुख्य प्रवक्ता भाजपा
3. संजय जाजू, सचिव सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार शास्त्री भवन, नई दिल्ली ।
4. महानिदेशक, PRGI, नई दिल्ली ।
5. महानिदेशक CBC, नई दिल्ली ।