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Saturday, August 30, 2025
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Homeअपराधउत्तराखंड वालों के लिए मेरे शिष्य ही बहुत हैं : स्वामी रामदेव

उत्तराखंड वालों के लिए मेरे शिष्य ही बहुत हैं : स्वामी रामदेव

 

* मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. विवेक बिंद्रा के साथ लाइव बातचीत में एक सवाल के जवाब में बोले रामदेव

( बातचीत के कुछ अंश ) 

देहरादून। स्वामी रामदेव के एक बयान के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ( आईएमए ) के साथ विवाद ने तूल पकड़ लिया है। दूसरी तरफ आज 29 मई को मोटिवेशनल स्पीकर डॉक्टर विवेक बिंद्रा के साथ एक लाइव बातचीत में विवेक ने स्वामी रामदेव से सवाल किया कि उत्तराखंड का आईएमए आपसे नाराज है। उनका कहना है कि आप कहते हैं कि आपकी कोरोनिल दवाई से कोरोना के मरीज ठीक हुए हैं। लेकिन यदि उत्तराखंड के किसी भी अस्पताल में आपकी दवाई से कोरोना के मरीज ठीक हुए हैं तो साबित कीजिए। बिंद्रा ने पूछा कि उनको आप क्या जवाब देंगे ? इस पर स्वामी रामदेव ने कहा कि उत्तराखंड वालों को जवाब देने के लिए मेरे शिष्य ही बहुत हैं। 

स्वामी रामदेव के इस जवाब का असर आई एम ए पर क्या होगा यह तो जल्द ही पता चल जाएगा। लेकिन यह लाइव बातचीत सुनने से एक बात तो स्पष्ट हो गई कि जहां आईएमए ने स्वामी रामदेव पर मानहानि का दावा ठोका है वही रामदेव भी अपनी बात से पीछे नहीं हट रहे हैं।

विवेक बिंद्रा के साथ ऑनलाइन बातचीत में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एलोपैथी को सर्वश्रेष्ठ बता कर आयुर्वेद को छोटा नहीं किया जा सकता है उन्होंने कहा कि वह डॉक्टरों को गलत नहीं कहते हैं लेकिन जो बीमारियां बहुत कम पैसों में ठीक हो सकती हैं उनके लाखों रुपए लेने वाले डॉक्टर और अस्पतालों के वह विरोधी हैं।

उन्होंने फिल्म अभिनेता आमिर खान का भी जिक्र किया जिसमें वह अपने 1 एपिसोड सत्यमेव जयते में एक डॉक्टर से सवाल करते हैं कि कुछ दवाइयां एलोपैथी की कई हजार में आती है और वही दवाइयां जेनेरिक मात्र ₹500 में मिल रही है। स्वामी रामदेव ने कहा यह भी इस बात का प्रमाण है कि एलोपैथी से उपचार करने के नाम पर बहुत कुछ लोगों से वसूला जाता है। 

डॉक्टर विवेक बिंद्रा के सवालों का जवाब देते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि उनके पास जो दवाइयां हैं वह बहुत सस्ती हैं और सभी को ठीक कर रही है। बिंद्रा के सवालों का जवाब देते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि आज से 20 साल पहले योग के बारे में लोग इतनी गंभीरता से नहीं जानते थे डॉक्टर भी उन्हें तरह-तरह की मशीनों से सांस लेने को कहते थे लेकिन आज प्राणायाम अनुलोम विलोम के जरिए गहरी सांसे लेकर लोग अपने आप को स्वस्थ रख रहे हैं। इसीलिए आयुर्वेद का भविष्य भी आने वाले समय में सर्वश्रेष्ठ रहेगा। 

 

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