22.3 C
Dehradun
Saturday, August 30, 2025
AdvertisementAdvertisement
spot_img
Homeअपराधराज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला : हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम की...

राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला : हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम की राशि 9 परसेंट ब्याज के साथ देने के आदेश

 

देहरादून। राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक पीड़ित व्यक्ति को हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम ना देने के जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को खारिज कर दिया।

साथ ही स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को पीड़ित व्यक्ति को क्लेम 20368 रुपए की राशि 9 परसेंट ब्याज सहित देने एवं मुआवजा और हरासमेंट के पांच-पांच हजार रुपए की राशि 45 दिन के भीतर देने के आदेश दिए। 

वादी नवीन छाबड़ा के अधिवक्ता अमित कुमार अरोड़ा ने आयोग की ओर से दिए गए फैसले की प्रति उपलब्ध कराते हुए जानकारी दी कि वादी नवीन छाबड़ा ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से बीती 5 मई 2011 को पांच लाख रुपए की हेल्थ पॉलिसी ली थी, जिसका वार्षिक प्रीमियम 7618 रुपए था। 

अधिवक्ता अमित ने बताया कि बीती 24 सितंबर 2011 को वादी नवीन की तबीयत खराब हुई तो वह देहरादून के बल्लूपुर चौक स्थित आस्था हॉस्पिटल में भर्ती हुए, जोकि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के तहत मान्य था।

उनका इलाज डॉक्टर पीके अग्रवाल ने किया। इस इलाज के दौरान उनका अस्पताल का बिल 20368 रुपए बना, जो उन्होंने क्लेम के लिए हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में भेजा। 

बताया गया कि पहले तो कंपनी की ओर से क्लेम की राशि देने के लिए न देने के लिए टाला जाता रहा। लेकिन बाद में कंपनी की ओर से बताया गया कि यह बीमारी अत्यधिक शराब पीने के कारण होती है, जिससे क्लेम की राशि नहीं दी जा सकती है और कंपनी की ओर से उक्त क्लेम खारिज कर दिया गया। 

इसके बाद वादी ने अपने अधिवक्ता अमित कुमार अरोड़ा के माध्यम से जिला उपभोक्ता फोरम में हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ क्लेम की राशि दिलाने को लेकर वाद दायर किया। लेकिन फोरम से भी उनका मुकदमा खारिज कर दिया गया। इस पर राज्य उपभोक्ता आयोग में वादी की ओर से 2014 में अपील की गई। 

राज्य उपभोक्ता आयोग में बीती 9 मई 2022 को वादी के अधिवक्ता अमित कुमार अरोड़ा की ओर से बहस की गई और बताया गया कि कंपनी की ओर से यह कहा गया कि वादी की बीमारी अत्यधिक शराब के सेवन के कारण हुई, जबकि संबंधित अस्पताल के डॉक्टर ने भी लिखित में यह बात कही है कि पीड़ित एल्कोहलिक नहीं है।

इस मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य उपभोक्ता आयोग की ओर से जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को खारिज कर दिया गया। आयोग ने अपने आदेश में पीड़ित को 20368 रुपए, नौ प्रतिशत ब्याज के साथ 2012 से अब तक देने के आदेश दिए।

साथ ही मुआवजा और हरासमेंट के भी पांच-पांच हजार रुपए की राशि 45 दिन के अंदर देने के आदेश जारी किए। 

 

 

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments