– भारतीय महिलाओं के लिए आदर्श बनीं गुरमीत
‘ कौन कहता है आसमां में छेद नहीं हो सकता, जरा एक पत्थर तबीयत से उछालो तो यारों ‘…… जी हां इन पंक्तियों को चरितार्थ किया है तिरंगे का मान बढ़ाने वाले भारतीय सेना के एक अफसर की पत्नी गुरमीत शारदा ने।
चंडीगढ़ निवासी 53 वर्षीय गुरमीत शारदा (मीतू) ने यूरोप और रूस की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस, 18,510 फीट (5,642 मीटर) को सफलता पूर्वक फतह कर शिखर पर भारत का तिरंगा फहराया। उनकी यह उपलब्धि साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर मेहनत का प्रेरणादायक उदाहरण है।

गुरमीत शारदा एक मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद और कलाकार हैं तथा मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्था स्पीकिंग क्यूब से जुड़ी हुई हैं। वह एक सेना अधिकारी की पत्नी और बहू भी हैं। शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, कला, दौड़ और पर्वतारोहण के क्षेत्र में उनकी सक्रियता उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाती है।
46 वर्ष की उम्र में शुरू की दौड़, 50–60 आयु वर्ग में हासिल किया प्रथम स्थान
गुरमीत शारदा ने 46 वर्ष की उम्र में दौड़ना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने कई मैराथन और लंबी दूरी की दौड़ों में हिस्सा लिया और लगातार अपनी फिटनेस को बेहतर बनाया।
दौड़ के क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने 10 किलोमीटर दौड़ की 50–60 वर्ष आयु वर्ग की श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि उनके अनुशासन, फिटनेस और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
दौड़ से विकसित हुई शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता ने आगे चलकर उनके पर्वतारोहण अभियान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
51 वर्ष की उम्र में शुरू हुई पर्वतारोहण की प्रेरणादायक यात्रा
गुरमीत शारदा ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में भी उम्र को बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने 51 वर्ष की उम्र में नेपाल की माउंट मेरा पीक (6,476 मीटर) को सफलतापूर्वक फतह किया।
इसके बाद 52 वर्ष की उम्र में भारत की माउंट यूनम (6,111 मीटर) पर सफल आरोहण किया और अब 53 वर्ष की उम्र में माउंट एल्ब्रुस को फतह कर उन्होंने अपनी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा है।

कठिन मौसम के बीच माउंट एल्ब्रुस पर सफलता
माउंट एल्ब्रुस अभियान की शुरुआत 11 अगस्त 2026 को हुई थी। अभियान के दौरान मौसम लगातार बदलता रहा। अत्यधिक ठंड, तेज हवाओं और खराब मौसम के कारण पर्वतारोहण दल को कई दिनों तक अनुकूल मौसम का इंतजार करना पड़ा।
लगातार बदलते मौसम के कारण अभियान लंबा होता गया और शिखर अभियान की चुनौती बढ़ती जा रही थी। आखिरकार 20 और 21 अगस्त को मौसम ने साथ दिया और दल को शिखर पर पहुंचने का अवसर मिला।
तमाम कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए गुरमीत शारदा ने 21 अगस्त 2026 को माउंट एल्ब्रुस के 5,642 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंचकर भारत का तिरंगा फहराया। 
सात शिखरों को फतह करने का लक्ष्य
गुरमीत शारदा का लक्ष्य दुनिया के सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों को फतह कर सात शिखर अभियान पूरा करना है।
माउंट मेरा पीक, माउंट यूनम और माउंट एल्ब्रुस की सफलता के बाद वह अपने इस बड़े सपने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं।
उनकी यात्रा विशेष रूप से महिलाओं और 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए प्रेरणा का संदेश है। उन्होंने साबित किया है कि जीवन के किसी भी पड़ाव पर नए सपने देखे जा सकते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए नई शुरुआत की जा सकती है।
एनएसवाई आउटडोर्स के अभियान में हासिल की उपलब्धि
माउंट एल्ब्रुस का यह अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान एनएसवाई आउटडोर्स द्वारा आयोजित किया गया था तथा अभियान का नेतृत्व प्रसिद्ध भारतीय पर्वतारोही नरेंद्र सिंह यादव ने किया।
गुरमीत शारदा की यह उपलब्धि केवल एक पर्वतारोहण सफलता नहीं, बल्कि साहस, आत्मविश्वास, मानसिक मजबूती और उम्र की सीमाओं को चुनौती देने की प्रेरणादायक कहानी है।
“उम्र केवल एक संख्या है, सपनों की कोई उम्र नहीं होती। 46 वर्ष की उम्र में दौड़ शुरू करने से लेकर 53 वर्ष की उम्र में माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर तिरंगा फहराने तक, गुरमीत शारदा की यात्रा हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहता है। ( यह जानकारी गुरमीत शारदा की ओर से उपलब्ध कराई गई है। )



