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Wednesday, April 1, 2026
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भारत में बढ़ रहे ‘ ऑटिज़्म ‘ प्रभावित : डॉ. निशांत नवानी, मायरा केयर फाउंडेशन ने मनाया विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस

 

देहरादून। विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के अवसर पर मायरा केयर फाउन्डेशन के संस्थापक डॉ. निशांत नवानी ने कहा भारत में ऑटिज़्म प्रभावित व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण उनके परिवारों को सामाजिक, शैक्षिक और चिकित्सकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। 

समाज के हर वर्ग को ऑटिज़्म के लक्षणों, पहचान और प्रबंधन के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने समावेशिता को प्रोत्साहन, स्कूलों, कार्यस्थलों और समुदायों में ऑटिज़्म प्रभावित व्यक्तियों के लिए बाधारहित वातावरण तैयार करना। समग्र सहयोग प्रणाली: चिकित्सा, शिक्षा, मनोवैज्ञानिक और व्यावसायिक प्रशिक्षण को एकीकृत करने को प्राथमिकता बताया। 

पत्रकारों के सवालों के जवाब में फाउंडेशन की सह संस्थापक डॉ. जया नवानी ने कहा उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में संसाधनों की कमी के कारण ये बच्चे अक्सर उपेक्षित रह जाते हैं। लेकिन समय पर हस्तक्षेप से 80% मामलों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। 

फाउंडेशन की ऑपरेशन्स हेड अनीता शर्मा ने होलिस्टिक लर्निंग सेंटर योजना की जानकारी दी। देहरादून में स्थापित हो रहे इस सेंटर की परिकल्पना ऑटिज़्म प्रभावित बच्चों और वयस्कों के लिए एक ‘एक छत के नीचे सब कुछ’ मॉडल पर आधारित है।

अनीता शर्मा ने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल शिक्षा नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को समग्र रूप से संबोधित करना है। सेंटर में आधुनिक थेरेपी, विशेष शिक्षा, कला चिकित्सा, योग और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी सेवाएं उपलब्ध होंगी। 

अनीता ने सेंटर की प्रमुख सेवाएं और योजनाओं के बारे में बताया विशेष शिक्षा कार्यक्रम: व्यक्तिगत लर्निंग प्लान (आईएलपी) के तहत संज्ञानात्मक विकास, थेरेपी सत्र: स्पीच, ऑक्यूपेशनल और बिहेवियरल थेरेपी, परिवार सहयोग: माता-पिता के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं और काउंसलिंग। 

एक सवाल के जवाब में उन्होंने भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया 2026 के अंत तक 50 बच्चों की क्षमता, उसके बाद विस्तार और मोबाइल यूनिट्स का संचालन। फंडिंग के लिए कॉर्पोरेट पार्टनरशिप और सरकारी सहयोग पर जोर रहेगा। 

शर्मा ने विशेष तौर पर कहा यह सेंटर उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी पहुंच योग्य होगा, जहां सरकारी सुविधाओं की कमी है, साथ ही कहा, “ऑटिज़्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक अलग तरह की प्रतिभा है। हमें इसे समझना और समर्थन देना होगा।” 

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